दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि पत्नी द्वारा पति पर पारिवारिक संपत्ति का बंटवारा करने और परिवार से अलग रहने का दबाव मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवाद पर अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि पत्नी लगातार पति पर अपने परिवार से अलग होने का दबाव बनाए, उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित करे और बार-बार शिकायतें दर्ज कराए, तो यह मानसिक क्रूरता मानी जाएगी।
न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसे व्यवहार विवाहिक जीवन के सामान्य उतार-चढ़ाव से परे हैं।
अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में पति से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह इस रिश्ते को निभाए।
महिला ने पारिवारिक अदालत के तलाक आदेश को हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(i-a) के तहत चुनौती दी थी, लेकिन हाई कोर्ट ने माना कि पति ने पर्याप्त सबूतों के माध्यम से पत्नी की क्रूरता को सिद्ध कर दिया है।





